अजित पवार केवल एक उपमुख्यमंत्री नहीं थे, बल्कि वे महायुति के भीतर एक ऐसे ‘बैलेंसिंग फैक्टर’ थे, जो देवेंद्र फडणवीस के लिए ढाल का काम करते थे. ‘दादा’ के नाम से मशहूर अजित पवार की सबसे बड़ी खासियत यही थी कि वे वैचारिक मतभेदों से ऊपर उठकर काम करने वाले व्यावहारिक नेता थे.
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