कानपुर में एक ऐसी परंपरा इस साल थम गई, जो करीब 84 साल से शहर की पहचान बनी हुई थी. अंग्रेजों के विरोध से शुरू हुआ यह रंग मेला हर साल भैंसे के ठेले पर रंगों के ड्रम लेकर निकलता था और पूरा शहर उसमें डूब जाता था. लेकिन इस बार भैंसा बिदकने की आशंका पर जिम्मेदारी की लिखित गारंटी नहीं मिली, तो भैंसा मालिक पीछे हट गया और ऐतिहासिक परंपरा टूट गई.
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