एनसीपी के एक वर्ग को डर था कि यदि यह निर्णय लंबित रहता है तो पार्टी के प्रमुख शरद पवार पार्टी से अलग हो सकते हैं या पार्टी का नियंत्रण उनके हाथ में आ जाएगा. इस वजह से एनसीपी के कुछ नेताओं ने फडणवीस से मुलाकात की और जल्दी निर्णय के लिए सहमति बनाई. यह निर्णय हड़बड़ी में लिया गया था ताकि पार्टी में किसी भी प्रकार का नुकसान न हो और संगठन एकजुट रहे. इस घटना से पता चलता है कि राजनीतिक दलों में अलग-अलग विचार और चिंताएं कैसे निर्णायक भूमिका निभाती हैं.
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