बलूचिस्तान में बढ़ती हिंसा के बीच एक पाकिस्तानी पत्रकार ने सेना और शहबाज सरकार की रणनीति पर सवाल उठाए हैं. एक लेख में उन्होंने कहा है कि सैन्य ताकत से लड़ाके तो मारे जा सकते हैं, लेकिन लोगों की नाराजगी खत्म नहीं की जा सकती. बलूच की नाराजगी, आर्थिक भेदभाव और विदेशी साजिश के आरोपों पर भी तीखी टिप्पणी की है.
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