दिल्ली की सड़कों पर एक युवक गड्ढे में गिरकर मर गया और उसके पिता पूरी रात बेटे को ढूंढते रहे.छह थानों के दरवाज़ खटखटाए गए, लेकिन कहीं भी सुनवाई नहीं हुई. सवाल पूछे गए, शक जताए गए, मदद नहीं मिली. सुबह जब पुलिस का फोन आया, तब कमल जिंदा नहीं था. यह सिर्फ एक हादसा नहीं, सिस्टम की बेरुखी का आईना है.
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