छावा, रहमान और 'बंटवारे' की महान खोज

एआर रहमान ‘छावा’ को समाज में विभाजन से ‘फायदा उठाने वाली’ फिल्म बताते हैं. उसे मराठों की ‘आत्मा और धड़कन’ कहकर सम्मानित भी महसूस करते हैं. अब यह वही आत्मा है या कोई वैकल्पिक आत्मा, यह वो खुद ही स्पष्ट कर सकते हैं.

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