'परेशां वो देख नहीं पाती किसी को…', ठहाकों, कविताओं और शेरों-शायरी से सजी परितोष त्रिपाठी की महफिल

साहित्य आजतक लखनऊ की महफिल में मशहूर कवि और परफॉर्मर परितोष त्रिपाठी ने अपनी चुलबुली Gen-Z कविताओं से दर्शकों को खूब हंसाया, प्रेम के मायने समझाए और फिर भावनात्मक रंग भी भर दिया. उन्होंने कहा कि सच्चा प्रेम त्याग और मर्यादा में है. प्रेम का प्रतीक ताजमहल नहीं बल्कि अयोध्या है.

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