'कविता हमेशा सच बोलती है…', कवयित्रियां बोलीं – झूठ सुनने वालों को लगता है

आज के दौर में कविता का महत्व क्या है और कैसे इसका स्वरूप बदल रहा है. कवि अपनी कल्पनाशीलता से जो सृजन करता है वो सच के कितने करीब होता है. इन बातों पर साहित्य आजतक लखनऊ के मंच पर ‘सच और झूठ के बीच की कविता’ नाम से एक सत्र का आयोजन हुआ.

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