1990 के दशक में जब अफगानिस्तान के मुजाहिद्दीन सोवियत संघ के खिलाफ लड़ रहे थे, उस समय हिबतुल्लाह अखुंदजादा, हिज़्ब-ए-इस्लामी में शामिल हुए थे. यह संगठन वहीं कट्टरपंथी समूह था जिसे मुजाहिद्दीन नेताओं ने स्थापित किया था. उनका मकसद अफगानिस्तान में इस्लामी शासन स्थापित करना था. Middle East Institute के अनुसार, उन्होंने आत्मघाती हमलावरों की नई फौज बनाई जो उनके कट्टरपंथ को दर्शाती है.
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