आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की मौत के बाद उत्तर प्रदेश का ये गाँव क्यों चर्चा में

बताया जाता है कि आयतुल्लाह ख़ुमैनी के परदादा सैयद अहमद मुसावी ‘हिंदी’ का जन्म 19वीं सदी की शुरुआत में बाराबंकी के किंतूर गाँव में हुआ था. सन 1834 के आसपास वह अवध के तत्कालीन नवाब के साथ ज़ियारत (दर्शन) के लिए ईरान गए थे और वहीं पर बस गए.