भारतीय राजनीति में तेरह साल का समय बहुत लंबा होता है. इस एक दशक में मोदी के संभावित चैलेंजर नीतीश कुमार को मोदी-केंद्रित राजनीतिक ब्रह्मांड में ‘मार्गदर्शक मंडल’ जैसे ‘रिटायरमेंट होम’ में धकेला जाना, उस नाटकीय शक्ति और वैचारिक बदलाव का उदाहरण है जिसमें धर्मनिरपेक्ष-सांप्रदायिक शब्दावली का अब कोई नैतिक महत्व नहीं रह गया है.
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