'मैंने सदन की गरिमा बढ़ाने का…', बोले ओम बिरला

मैंने सदन के हर माननीय सदस्य की बात को ध्यान पूर्वक और गंभीरता से सुना. मैं इस सदन के सभी सदस्यों का दिल से आभार व्यक्त करता हूँ, चाहे वे समर्थन में अपने विचार रखें या आलोचना के रूप में सुझाव दें. इस प्रकार के संवाद से हमें बेहतर समझ और सामंजस्य प्राप्त होता है जो लोकतंत्र का आधार भी है. सदन के सदस्य अपने विचार खुले मन से रखते हैं ताकि समस्या का समाधान निकाला जा सके और देश की प्रगति सुनिश्चित हो सके.

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