ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभव के बाद भारतीय सेना ने ड्रोन और काउंटर ड्रोन तकनीक पर अपना ध्यान केंद्रित किया है. गणतंत्र दिवस पर प्रधानमंत्री के भाषण में ड्रोन शक्ति ईगल प्रहार का उल्लेख हुआ जो इस फोकस का परिणाम है. देश में ड्रोन डिजाइन और विकास के लिए एक इको सिस्टम बनाएं जाने की योजना है, जिससे निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध संचालन बेहतर होंगे. ऑपरेशन सिंदूर में शामिल शक्ति बाड रेजिमेंट ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. परेड में झुंड वाले ड्रोन, लाइटिंग एम्युनिशन और लंबी दूरी के ड्रोन दिखाए गए, जो दुश्मन ठिकानों को पांच से 500 किलोमीटर दूर से निशाना बना सकते हैं. इसमें आकाश एयर डिफेंस सिस्टम और लॉन्ग रेंज एंटीशिप हाइपरसोनिक मिसाइल जैसे स्वदेशी हथियार शामिल हैं जो समुद्री और जमीनी लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से नष्ट कर सकते हैं. यह परेड साफ संदेश देती है कि ऑपरेशन सिंदूर केवल शुरुआत है और भविष्य की लड़ाई में भारत नई पराक्रम गाथा लिखने को तैयार है.
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