बजट में कैंसर, बायोफार्मा, आयुष और मानसिक स्वास्थ्य जैसे जरूरी विषयों को जगह मिली, लेकिन फेफड़ों की सेहत को लगभग पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया. जबकि भारत में करोड़ों लोग दमा, सीओपीडी, टीबी के बाद की समस्याओं और प्रदूषण से जुड़ी सांस की बीमारियों से जूझ रहे हैं. न कोई राष्ट्रीय लंग हेल्थ मिशन है और न ही प्राथमिक स्तर पर जांच और इलाज की ठोस व्यवस्था.
Related Posts
Uncategorized
निशांत कुमार जेडीयू में हुए शामिल, क्या इस एंट्री के साथ शुरू होगी बड़ी परीक्षा
- BBC News हिंदी
- March 8, 2026
- 0
निशांत क़रीब 50 साल के हो चुके हैं. मुख्यमंत्री का बेटा होने के बाद भी वो अपने पिता की सियासी ज़िंदगी से अब तक दूर रहते आए हैं. क्या वो अपने सामने वाली राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर पाएंगे?…
Uncategorized
‘जितना बड़ा रिस्क, उतना बड़ा रिवॉर्ड…’, गंभीर ने बताया भारत ने कैसे जीता वर्ल्ड कप
- आज तक
- March 9, 2026
- 0
टीम इंडिया की T20 वर्ल्ड कप जीत के बाद कोच गौतम गंभीर ने बताया कि टीम की सफलता का मंत्र ‘हाई रिस्क, हाई रिवॉर्ड’ की सोच रही. उन्होंने कहा कि T20 में डिफेंसिव क्रिकेट से जीत संभव नहीं. टीम मैनेजमेंट खिलाड़ियों को रन नहीं, बल्कि इम्पैक्ट से आंकता है और स…
Uncategorized
बॉलीवुड की होली: जब रंगों के टैंकर में फेंके गए सुपरस्टार्स, जमती थी महफिल
- आज तक
- March 4, 2026
- 0
बॉलीवुड में एक ऐसा दौर था जब होली की पार्टी करने लगभग सभी सितारे राज कपूर के स्टूडियो पहुंच जाते थे. वहां शानदार तरीके से होली का त्योहार मनाया जाता था. अमिताभ बच्चन भी अपने घर पर होली की महफिल जमाते थे. आइए, इस खास मौके पर उन पलों को एक बार फिर याद कर…