बांग्लादेश में 12 फरवरी को संसदीय चुनाव होने जा रहे हैं जो पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के तख्तापलट के 555 दिनों बाद हो रहे हैं. अल्पसंख्यक हिन्दुओं की स्थिति में शायद कोई बदलाव न हो. चुनावों से कुछ घंटे पहले जमात-ए-इस्लामी के अध्यक्ष डॉ शफीकुर रहमान ने फिर से कहा कि वे और उनकी जमात किसी को भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यक नहीं मानते. यह घटनाक्रम चुनावी माहौल को और जटिल बनाता दिख रहा है. यह चुनाव बांग्लादेश की राजनीति में महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा.
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