पुराने-दान में मिले कपड़े, जो साइज में कई गुना बड़े या छोटे हों…उलझकर जूट बन चुके बाल… पैसे या खाना देते हुए हिकारत-घुली-दया… और अनाथ का पुछल्ला…यही मेरी पहचान थी. कालका जी मंदिर के आगे पली-बढ़ी. बचपन में मुझे बस भूख और सर्दी-गर्मी समझ आती थी. उम्र बढ़ी तो इसमें डर शामिल हो गया. रात का. लोगों का. अनचाहे चली आई नींद का.
Related Posts
Uncategorized
तारिक रहमान की 17 साल बाद धमाकेदार वापसी, बांग्लादेश चुनाव में दोनों सीट जीते
- आज तक
- February 12, 2026
- 0
तारिक रहमान की यह जीत बांग्लादेश की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत मानी जा रही है, खासकर ऐसे समय में जब पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग चुनाव मैदान से बाहर है. चुनाव के दिन तारिक रहमान ने राजधानी ढाका के गुलशन मॉडल हाई स्कूल एंड कॉलेज मतदान …
Uncategorized
Video: नारियल के पैसे मांगने पर बिफरे दारोगा, दुकानदार को पीटा और ले गए सामान
- आज तक
- March 12, 2026
- 0
उत्तर प्रदेश के अमरोहा में नारियल के पैसे मांगने पर एक दारोगा द्वारा दुकानदार से मारपीट करने का मामला सामने आया है. आरोप है कि दारोगा ने दो नारियल पीने के बाद 140 रुपये मांगने पर दुकानदार को थप्पड़ मारे और उसके नारियल गाड़ी में भरकर कोतवाली ले गए. घटना…
Uncategorized
‘तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई घोड़ी पर सवार होने की’: पाटन में दलित की बारात पर हमला, गांव के लोगों ने क्या बताया?
- BBC News हिंदी
- February 9, 2026
- 0
बारातियों ने बताया कि अगर वे भागकर घर न लौटते, तो उनकी जान जा सकती थी. पुलिस ने दोनों पक्षों के बीच पुरानी दुश्मनी की बात कही है, लेकिन दलित परिवार का कहना है कि यह हमला उनकी जाति की वजह से किया गया….