1965 के युद्ध के बाद भारत सरकार ने ‘शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968’ बनाया था, इसके तहत ये संपत्तियां कस्टोडियन ऑफ एनिमी प्रॉपर्टी फॉर इंडिया (CEPI) के पास सुरक्षित रहती हैं, जो गृह मंत्रालय के अधीन आता है. कानून के मुताबिक, शत्रु देश के नागरिक या उनके वारिस इन संपत्तियों को ट्रांसफर, बेच या विरासत में नहीं दे सकते.
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