इराक और कुवैत के बीच ये मसला अभी कूटनीतिक स्तर पर है. लेकिन 1990 को याद कीजिए. तब सद्दाम हुसैन ने इसी तरह के विवादों को बहाना बनाकर कुवैत पर आक्रमण किया था, जिससे इतिहास की यादें ताजा हो रही है. अब सद्दाम तो नहीं हैं लेकिन मुद्दा लगभग वैसा ही है. जलमार्ग नेविगेशन, तेल परिवहन और मछली पकड़ने का अधिकार दोनों देशों के लिए संवेदनशील है.
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