CJI ने कहा कि यह तर्क देना आसान है कि घरेलू कामगारों के मामले में संविधान के अनुच्छेद 21, 23, 14, 15 और 16 का उल्लंघन हो रहा है, लेकिन इसके नतीजों पर भी गंभीरता से विचार करना होगा. उन्होंने आशंका जताई कि अगर न्यूनतम वेतन तय किया गया तो कई लोग घरेलू कामगार रखना ही बंद कर देंगे और इससे सबसे ज्यादा नुकसान उन्हीं कामगारों को होगा.
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