राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि गिरफ्तारी से कोई शख्स दोषी सिद्ध नहीं होता. आरोपी की फोटो जारी करना अनुच्छेद 21 के तहत गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का उल्लंघन है. कोर्ट ने पुलिस को आरोपी और अधिवक्ता की तस्वीरें तुरंत हटाने के निर्देश दिए हैं. मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी 2026 को होगी.
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