Premanand Maharaj: प्रेमानंद महाराज ने स्पष्ट किया कि हिंदू धर्म में भक्ति को जाति, कुल या जन्म की सीमाओं में बांधा नहीं जा सकता है. उन्होंने कहा कि भक्ति का मार्ग समर्पण, आचरण और भाव से जुड़ा है, न कि किसी जाति या कुल से.
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