‘तुम्बाड़’ के बाद राही अनिल बर्वे की ‘मायासभा’ बिना बजट, बिना प्रमोशन और बेहद कम स्क्रीन्स के थिएटर्स में उतर रही है. जावेद जाफरी ने इसे करियर की बेस्ट परफॉर्मेंस कहा है. ये साइकोलॉजिकल थ्रिलर अब पूरी तरह दर्शकों के वर्ड ऑफ माउथ के भरोसे है— सवाल बस यही है, क्या जनता इसे ढूंढ पाएगी?
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