बजट में कैंसर, बायोफार्मा, आयुष और मानसिक स्वास्थ्य जैसे जरूरी विषयों को जगह मिली, लेकिन फेफड़ों की सेहत को लगभग पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया. जबकि भारत में करोड़ों लोग दमा, सीओपीडी, टीबी के बाद की समस्याओं और प्रदूषण से जुड़ी सांस की बीमारियों से जूझ रहे हैं. न कोई राष्ट्रीय लंग हेल्थ मिशन है और न ही प्राथमिक स्तर पर जांच और इलाज की ठोस व्यवस्था.
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