IIT मद्रास और शास्त्र यूनिवर्सिटी की ताजा स्टडी में पता चला है कि भारत में दिव्यांग कर्मचारियों को नौकरी में समान अवसर नहीं मिल रहे हैं. कंपनियां केवल उन दिव्यांगों को नौकरी देती हैं जो पहले से ज्यादा सक्षम होते हैं, जबकि जिन्हें ज्यादा सहायता की जरूरत होती है, उन्हें नजरअंदाज किया जाता है. मेंटरशिप की कमी और कार्यस्थल पर सहकर्मियों का समर्थन न मिलने से उनकी उत्पादकता प्रभावित होती है.
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