अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष के बीच सूफी तराना ‘दमादम मस्त कलंदर’ ने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता का प्रतीक बनकर ध्यान आकर्षित किया है. यह तराना 13वीं सदी के सूफी संत लाल शाहबाज़ कलंदर को समर्पित है और सदियों से विरोध और विद्रोह का प्रतीक रहा है.
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